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My Dear Maa
Written by SSCHUG   
Thursday, 20 May 2010 11:26
SSCHUG
प्यारी जीवन दायिनी माँ!,

जब मैनें इस जीवन में किया प्रवेश

पाया तेरे ऑंचल का प्यारा-सा परिवेश

मेरे मृदुल कंठ से निकला पहला स्वर माँ!

पूस की कॅंपी-कॅपी रात में, तूने मुझे बचाया।

भीगे कम्बल में स्वयं सोकर, सूखे में मुझे सुलाया॥

तब भी नहीं निकली तेरी कंठ से, एक भी आह।

क्योंकि तुम्हें थी मेरे चेहरे पर, प्यारी हँसी की चाह॥

तुम ही थी माँ, जिसने चलना सिखाया।

मुझ अबोध बालक को, अक्षर ज्ञान कराया॥

तेरे ही दम पर, भले-बुरे को परखना सीखा।

जीवन में आई विषम परिस्थितियों से, लड़ना सीखा॥

मेरे हदय की हर धड़कन, जुड़ी है तुझसे।

इसीलिए मॉ मेरा, कुछ भी नही छुपा है तुझसे॥

जब भी होता हूँ सुख-दुख में, तुम मुझे याद आती हो।

जब होता हूं उलझन में, तुम ही राह दिखाती हो।

ऐसा लगता है मानो, मेरे सिर पर तुम्हारा ह्यथ है॥

हर घड़ी हर समय हर पल, तुम्हारा ही साथ है।

सागर की गहराई सा, गगन की ऊंचाई सा, तेरा प्यार।

जीवन भर मुझे मिलता रहे, यही है तमन्ना बार-बार॥

प्यारी जीवन दायिनी माँ !
संजय फरवाहा

 

Comments  

 
#1 Inderjit Singh Dhillon 2010-05-22 20:26
chugh sabhib....maa .....maa hi hai.......rabb da doosra roop hai maa.....mainu apne parents naal bahut pyaar hai ...................i loves him very much
 

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