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Written by मेरी भावनाओं का सागर , संजय कुमार फरवाहा
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Saturday, 13 November 2010 19:18 |
बाल दिवस एक कवीता

इस बार बाल दिवस पर कुछ नया कर के दीखाओ फीर बाल दिवस मनाओ
इस बार पहले होटलों, रेस्तराओं, चाय दुकानों, पर जाओ बालकों को बाल श्रम से बचाओ , उनकी दय्निया हालत पर दृष्टी दोडाओ फीर बाल दिवस मनाओ
इस बार बाल दिवस पर कुछ नया कर के दीखाओ फीर बाल दीवस मनाओ
इस बार पहले बालको को घरेलू नौकर के रूप में अपमान और उत्पीड़न सहने से बचाओ फीर बाल दीवस मनाओ इस बार बाल दीवस पर कुछ नया कर के दीखाओ फीर बाल दीवस मनाओ
इस बार पहले ईंट भट्ठों, और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम कर रहे बालकों पर नज़र घुमाओ, उनका शोषण रुकवाओ फीर बाल दीवस मनाओ इस बार बाल दिवस पर कुछ नया कर के दिखाओ फिर बाल दिवस मनाओ
बालकों पर बना लीया ‘बाल श्रम अपराध कानून’ आपने बालकों पर जत्ता लीया भाषणों से बड़ा प्यार आपने इस बार बालकों को घनघोर गरीबी में जीने के अभिशाप से बचाओ फीर बाल दीवस मनाओ इस बार बाल दीवस पर कुछ नया कर के दीखाओ फिर बाल दिवस मनाओ
इस बार पहले बालकों के हाथ में पढने लिखने के लिए कापी,पेंसिल और स्कूल का बस्ता थमाओ बालकों को गली गली कूड़ा कचरा चुनने से बचाओ फीर बाल दीवस मनाओ इस बार बाल दीवस पर कुछ नया कर के दीखाओ फीर बाल दीवस मनाओ
आपने अपने लम्बे भाषणों में बच्चों को देश का भविषय बताया पर बच्चों ने संसाधनों के आभाव में अपनी इच्छाओं का है गला दबाया इस बार पहले बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी मन से नीभाओ फीर बाल दीवस मनाओ इस बार बाल दीवस पर कुछ नया कर के दीखाओ फीर बाल दीवस मनाओ
{ संजय कुमार फर्वाहा }
नया नंगल
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Last Updated on Saturday, 13 November 2010 19:41 |